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कृष्णा सोबती जी, आपको जन्मदिन मुबारक हो !!

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आज हिन्दी की मशहूर साहित्यकार कृष्णा सोबती जी का ८४ वाँ जन्मदिन है। उनको इसकी बहुत-बहुत बधाई। 'मित्रों मरजानी', 'जिंदगीनामा', 'ऐ लडकी', 'सूरजमुखी अंधेरों के' और 'दिल ओ दानिश' जैसी रचनाओं के माध्यम से मानवीय रिश्तों और स्त्री के व्यक्तित्व की जटिलताओं को बड़ी ही कुशलता से चित्रित पाठकों की चेतना को विकसित करने वाली कृष्णा जी को हिन्दी साहित्य जगत बहुत ही आदर की दृष्टि से देखता है। उनके उपन्यास 'जिंदगीनामा' के लिए उनको १९८० में न सिर्फ़ साहित्य अकादमी के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. बल्कि १९९६ में उनको साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान 'साहित्य अकादमी फेलोशिप' से भी नवाजा गया था। इसके अलावा उनके अनूठे साहित्यिक योगदान के लिए उनको शिरोमणि पुरस्कार, शलाका पुरस्कार और व्यास सम्मान से सुशोभित किया गया है। कृष्णा जी अपनी 'बोल्ड' और 'बिंदास' लेखनी के लिए जानी जाती है। उनके कथ्य और उसको प्रस्तुत करने की उनकी अनोखी शैली उन्हें तमाम साहित्यकारों की भीड़ से अलग करके एक ऊंचा स्थान प्रदान करती है। उन्होंने अपनी रचनाओं में...