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आख़िर इन विवादों की मंशा क्या है?---चार

ये चिचिआने वाले चिचिआने वालों को सिर्फ़ चिचिआना आता है। और कुछ नहीं। ऐसे लोगों को अगर गले लगा लो, तो चिचिआते हैं। गले न लगाओ तो चिचिआते हैं। इनको सम्मान दो तो बुरा, न दो तो बुरा। ये हर हाल में चिचिआते हैं। ऐसे लोग नहीं चाहते कि कोई इनको टोके-टाके या इनके कार्य-व्यवहार में कोई कमी निकाले। ये अपनी मर्जी चाहे जो करें, कोई इनको चुस्त-दुरुस्त करने की कोशिश बिल्कुल न करे और अगर किसी ने उनको सही रस्ते पर लाने की या उनकी धूल झाड़ कर उनको साफ़-सुथरा करने की कोशीश की, तो ये फ़ौरन चिचिआने लगते हैं व पूरा आसमान सर पर उठा लेते हैं। ऐसे लोग बातें बड़ी ऊँची-ऊँची और लम्बी-चौड़ी करते हैं, उदार, प्रगतिशील, जनवादी व क्रांतिकारी बनते हैं, पर हकीकत में बहुत ही संकीर्ण एवं दकियानूस होते हैं। साफ़ शब्तों में नक़ली और दोहरे चरित्र वाले। ऐसे लोगों की प्रतिभा और बौद्धिकता सिर्फ़ इनका मुखौटा या समाज में प्रतिष्ठा पाने की सुरक्षित छतरी होती है, जो मौका पाते ही तुंरत उतर जाती है। और ये भी रेंज सियार की तरह तुंरत हुआं हुआं करने लगते हैं। ये लोग हमेशा महिलाओं को बराबरी का दर्जा और आजादी देने की बातें क...