रविवार, 13 फ़रवरी 2011

फैज़ आज भी जिंदा हैं...और आगे भी रहेंगे....हमारे दिलों में

आज महान और मशहूर क्रांतिकारी शायर फैज़ अहमद फैज़ की जन्म-शती है।...उनको सौ-सौ बार सलाम!...फैज़ सिर्फ उर्दू के ही नहीं,सिर्फ पाकिस्तान के नहीं, इस पूरी दुनिया में हिंदी-उर्दू और पंजाबी समझने वाले करोड़ों-आम-मेहनत कश और मजलूमों के शायर हैं। वे सिर्फ एक शायर ही नहीं....उनकी चेतना की मुकम्मिल आवाज़ भी हैं!...
एक भूमिहीन परिवार में पैदा होकर,बचपन लगभग मुफलिसी में गुज़ार कर और जीवन के अनेकों विकट संघर्सों से गुजरते हुए फैज़ ने जब अपनी चेतना व दृष्टि को एक सोच भरी इंकलाबी धार से लबरेज़ कर दिया एवं अपनी आवाज़ को बहुसंख्यक शोषितों,पीड़ितों तथा वंचितों की आवाज़ बना दी, तो एक समय में ब्रिटिश फौज में ऊंचे पद पर रहने वाले और "मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरी महबूब माँग" जैसी विश्व-प्रसिद्द प्रेमभरी नज़्म लिखने वाले फैज़ अहमद फैज़ पाकिस्तानी हुकूमत को जरा भी बर्दाश्त नहीं हुए और कई बार जेल की सीखचों के पीछे डाल दिए गए। ....लेकिन फैज़ की शायरी को कभी भी कैद नहीं किया जा सका। बल्कि उनकी शायरी धीरे-धीरे दुनिया भर के मजलूमों की आवाज़ बन कर और हुकूमत की सख्त चाहदीवारों को भेद कर उभरने लगी...और समय के साथ-साथ उनके शेरों-नगमों और नज्मों की धार तेज़ से तेजतर होती चली गयी।...क्रांति की आग से भरी हुयी।......
"ये दाग-दाग उजाला, ये शब् गज़ीदा सहर। वो इंतज़ार था जिसका, ये वो सहर तो नहीं."......"नजाते-दीदा-ओ-दिल की घड़ी नहीं आयी. चले चलो कि वो मंजिल अभी नहीं आयी."...वो वक्त करीब आ पहुंचा है, जब तख़्त गिराए जायेंगे. जब ताज उछाले जायेंगे।"..."कटते भी चलो, बढ़ाते भी चलो,बाजू भी बहुत है सर भी भाहूत."....निसार मै तेरी गलियों पर ऐ वतन कि जहाँ,चली है रस्म कि कोई न सर उठा के चले."....."हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्सा मांगेंगे, एक खेत नहीं एक बाग नहीं, हमसारी दुनिया मांगेंगे ....जब साफ सीधे हो जायेंगे, जब सब झगरे मिट जायेंगे,हम हर देश के झंडे पर एक लाल सितारा मांगेंगे ।"....
जैसे आग उगलते नगमे पिचले सत्तर सालों से आज भी जन संघर्सों और जनांदोलनों की मुखर आवाज बने हुए हैं।
इसलिए इस दुनिया में जब तक गरीबी है, अन्याय है,शोषण-अत्याचार है,भ्रष्टाचार है और जब तक इस दुनिया में इन सब के खिलाफ इंसानियत की जंग जारी है, संघर्षरत व्यापक जन समुदाय के दिलो-दिमाग में फैज़ अहमद फैज़ और उनके नग्में व मिसरे तब तक जिंदा रहेंगे.....सलाम फैज़ आपको बार-बार सलाम!
(फैज़ का चित्र गूगल इमेज़ेस से साभार)