बुधवार, 28 जनवरी 2009

ओबामा की जासूसी का सच

कौन कहता है कि अमेरिका इस समय भीषण संकट के दौर से गुजर रहा है ?कम से कम नए राष्ट्रपति ओबामा की ताजपोशी के भव्य लाइव टेलीकास्ट को देख कर तो ऐसा नही लगता है कि वहां के बैंक कंगाल हो गए हैं.बाज़ार सूने पड़े हैं.उद्योग धंधे ठप्प पड़े हैं. गरीबी और बेरोजगारी काफी बढ़ गयी है.उस दिन अमेरिका परस्त पूरी दुनिया की मीडिया ने यह स्थापित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी कि अमेरिका अभी भी अमीर और शाहखर्च है.और इस तरह की छोटी-मोटी आर्थिक मंदी तो उसके लिए कोई समस्या ही नहीं है. बेल आउट और राहत पैकेज-वैकेज तो बाद में देखा जायेगा,पहले दुनिया भर को यह बता दिया जाए कि उसकी वास्तविक शानो-शौकत क्या है ?लोंगो ने देखा.लोग खुश हुए.और आश्वस्त भी कि यह नया राष्ट्रपति अमेरिका सहित पूरी दुनिया को बदल देगा।
पर लगता है,इन् तमाम दरबारी मीडिया को इस से भी संतोष नहीं हुआ.अचानक उनको लगा कि इतने सारे ताम-झाम के बावजूद प्रभाव उतना पड़ा नहीं जितना कि उम्मीद थी.आर्थिक मंदी और संकट की चहुँओर होने वाली चर्चाओं के शोर में ताजपोशी का यह कार्यकर्म और उसके पीछे का संदेश कंही नक्कारखाने में तूती बन कर ना रह जाए.इसलिए अगले ही दिन उन्होंने बड़े ही सुनियोजित तरीके से यह ख़बर फैला दी कि उस दिन ओबामा के पूरे कार्यक्रम की जासूसी ओसामा के अलावा दूसरे ग्रह के लोग भी कर रहे थे.उड़नतश्तरी में बैठकर कुछ एलियन आए,उन्होंने गुप-चुप तस्वीरे खींची और उड़नछू हो गए।
वैसे आप और हम इसे बेवकूफी ही कहेंगे.क्योंकि दूसरे किसी ग्रह पर जीवन है कि नहीं, यह तो ख़ुद अमेरिका भी अभी तक साबित नहीं कर पाया है.पर यह ख़बर सिर्फ़ अमेरिका में ही नहीं,ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया सहित उन तमाम देशों में भी खूब फैलाई गयी,जिनका भविष्य आज पूरी तरह से अमेरिका के भविष्य पर टिका हुआ है.पर क्या है, इस ख़बर का असली मंतव्य ?मतलब साफ़ है.आज अमेरिका के तमाम लग्गू-भग्गू और पूरी दुनिया में फैले उनके मीडिया-इन्द्रजाल हर तरह से यह स्थापित करने पर तुले हुए हैं कि अमेरिका अभी भी एक ताकतवर देश है.और ओबामा और अमेरिका से अभी भी न सिर्फ़ ओसामा,अलकायदा और तालीबान बल्कि दूसरे ग्रहों को भी खतरा है.तो क्या अब अमेरिका आतंकवाद के साथ-साथ दूसरे ग्रहों से होने वाले हमलों का भी दिकः-दिखा कर पूरी दुनिया को डराएगा ?पर इन हरकतों से तो लगता है कि अमेरिका तो ख़ुद ही डरा हुआ है।
अंत में मैं कवि गोरख पाण्डेय की एक कविता से अपनी बात ख़तम करता हूँ.कल उनकी पुण्यतिथि भी है.

वे डरते हैं
किस चीज़ से डरते हैं वे
तमाम धन दौलत
गोला-बारूद,पुलिस-फौज के बावजूद ?
वे डरते हैं कि एक दिन
निहत्थे और गरीब लोग
उनसे डरना
बंद कर देंगे.
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